Independence Day Special

Our country -our love!

जिसकी मिट्टी के

रंग हो अनेक

जहाँ हर किसी की

सोच हो नेक

जहाँ हर डाल होता

चिडि़यों का बसेरा

जहाँ हर रोज़ लगता

प्यार-मोहब्बत का डेरा

यही भारतवर्ष है मेरा

यही भारतवर्ष है मेरा

कुछ शब्दों के ज़रिए

कर रहीं हूँ पेश

भोर के स्वप्न-सा

मेरा देश

भोर के स्वप्न-सा

मेरा देश !

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The All New Poetry Session

No substitute of success

The journey

To start

To play well

& smart

I wish to

Never stop

Trying to be classy

Without any drop

O yeah!

I will succeed

Patience, Hard Work

And good deed

These three are

The success signs

Today is your

But tomorrow

Will be mine

From now

No guilty

From now

No beg

The time is coming

To stand on

The leg

Olders blessing

And youngers love

Fly so high

No limits are above

No connection

Now nothing to approach

Keep calm bae

Just wait & watch!

Why to follow me?

  • Hey dude! What’s up ? Thanks for everyone who visited, who viewed , who liked and who commented . Yaah! Thank you for all such efforts . Doesn’t matter that it wasn’t a big number of viewers and all but this little much is enough for boosting my energy level and encouraging me to write up more here. I am starting neither to earn money here nor to get popularity but yes! Just to get a feeling of inner peace as writing and composing poems is my first and last passion. Seeing others reading my work and appreciating me is the bestest feeling a write have ! I don’t need a huge number of readers but want to constant some of them to have a look and enjoy the reading.

Thanks for following me !

Thanks for visiting here

Thanks for viewing post

And big thanks for liking and commenting on my work!

Hindi Poetry 


Going to start my new journey in a new world with a new poem . Excited about it. Read carefully and give feedback.

कदर :
समझ नही सका कोई

समझा नही मैं पाया

खुशी में नहीं

चंद गमों में है

ये सफर समाया

पता नहीं

अच्छा बन के भी

कैसे बुरे हैं हम

थामा नहीं उसने

मुश्किल में जिसके साथ

रखे थे कदम

दर्द भी है

और मंद भी हूँ

सुनाई ना दे जहाँ से

इक कमरे में बंद हूँ

खत्म नहीं हो रहा

मुसीबतों का ये सागर

क्यूँ खडा़ कर दिया

बीच रास्ते पे ला कर

जब वक्त बीत गया

तब आया है समझ

क्या खोया है

क्या पाया है

और कितनों पे लुटाया है

जिंदगी ये यूं

बदसलूखी कर गई

सूखी नदी भी

आँशुओं से

समंदर भर गई

माशाअल्लाह!

क्या तोहफा मिला

वफादारी का

अरे! वो तमाशा दिखाता

बंदर भी न था

मदारी का

यूं तो चली आ रही

ये रीत

बरसों सालों की

कोई कदर नहीं करता

कदर करने वालों की

बहुत अच्छे थे

दिन वो

जब बच्चे थे हम

उम्र थी कम

पर अच्छे थे हम

न वाकिफ़ थी हकीकत

न मश्किलों का साया

इस जिंदगी ने

बहुत कुछ है सिखाया

चाहती तो अब भी नहीं

दूर जाना

यहाँ से

पर समझ नहीं आता

शुरू करूँ कहाँ से

यूँ तो है खुले

रास्ते हजा़रों

जाऊँ किस तरफ

किनारे हैं अलग चारों

क्यूँ फिक्र है मुझे

उन जाल बिछाने वालों की

जब कोई

कदर नहीं करता

कदर करने वालों की!